देवेंद्र थपलियाल गाँव के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

देवेंद्र थपलियाल गाँव के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

ऋषिकेश- कौन कहता है आसमान में छेद हो नहीं सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।इन पक्तियों को चरितार्थ करने में जुटे हुए हैं देवेन्द्र दत्त थपलियाल।
उत्तराखण्ड राज्य मिलने के बाद भी पलायन रोकने के लिए कोई बेहतरीन नीति न बनने के कारण सम्पूर्ण उत्तराखण्ड के गांवों से नोजवान धीरे -धीरे शहरों की तरफ स्वास्थ्य,शिक्षा ओर रोजगार के लिए जाने लगे ।राज्य प्राप्ति के इन 19 वर्षों मे भी सरकार कोई बेहतरीन नीति पलायन रोकने के लिए नहीं बना सकी है ।लेकिन वैश्विक महामारी की आपदा के चन्द दिनों के अंदर ही देश- विदेश मे आजीविका के लिए गये युवाओं को वापस गांव लौटने के लिए विबश कर दिया है ।वहीं जहाँ पलायन रुकने का संकेत देखा जा रहा है वहीं उत्तराखण्ड के गांवों मे स्वरोजगार के नये आयामों को ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है।
जनपद टिहरी गढ़वाल के विकास खण्ड घनसाली से 30 किमी दूर स्थित हिंदाव पट्टी के अंथवाल गाँव ग्राम सभा मे निवास करने वाले देवेंद्र दत्त थपलियाल जो स्वयं एक इलेक्ट्रिकल्स इंजीनियर रहे हैं जिन्होंने लगभग 20 वर्ष तक मुम्बई की नामी कम्पनियों मे सीनियर इंजीनियर के रूप मे कार्य किया है ।वे वर्षों की सेवा के बाद कई वर्षों पहले अपने गांव लौटे हैं। ओर गांव मे ही अपनी प्रतिभा व कौशल का प्रदर्शन करते हुए स्वयं मे गांव के युवाओं के लिए स्वावलम्बन की प्रेरणा बने हुए हैं , जिन्होंने गांव की बंजर भूमि मे अपने श्रमजल के माध्यम से जड़ी बूटी उगाने का संकल्प फलीभूत किया है वहीं अनेक लोगों को रोजगार का साधन भी सुलभ करवाया है ।
इंजीनियर देवेंद्र दत्त थपलियाल का कहना है कि शहरों की दौड़ती, रेंगती जिंदगी से उन्हें अपने गाँव मे ही स्व रोजगार की प्रेरणा जागृत हुई है ।परिवार मे सबसे बड़े होने के कारण पूरे परिवार का भार स्वयं के कन्धों पर होने के कारण गांव की माटी को प्रणाम कर यहाँ कुछ करने की मन मे ठानी , अनेक प्रकार के व्यवसाय -होटल ,गांव -गांव मे टेलीविजन के माध्यम से मनोरंजन ,बिजली के साथ अनेक तकनीकी से सम्बन्धित कार्य , यानी कोई भी कार्य पहाड़ों का ऐसा नहीं था जो न किया हो । अनेक प्रकार के उतार चढाव जीवन मे इन दिनों मे देखे पर लगाव था अपनी भूमि से कि -“जननी जन्मभूमि से। उन्होंने बताया हिम्मत के साथ शुरू किया अपना जड़ी बुटी उगाने का कार्य जो धीरे-धीरे आज अच्छी स्थिति मे बढ़ता जा रहा है जहाँ पर औषधीय नर्सरी के रूप मे कूट, कड़वी, लेमन ग्रास, वन तुलसी, चिरायता,बज्र दन्ती, चन्द्रू, मोरिया,चोरु औषधीय एवं अनेक फलदार प्लांट उगाने का कार्य किया जा रहा है वहीं कई महिलाओं व पुरुषों को रोजगार का अवसर भी सुलभ हो रहा है ।
देवेंद्र दत्त थपलियाल का कहना है कि वैश्विक महामारी के संकट ने हजारों उत्तराखण्डी नोजवानों के सामने रोटी का संकट खड़ा कर दिया है ।लेकिन यदि उनके अंदर कुछ करने की क्षमता व लग्न हो तो उन्हें इस देवभूमि से कहीं बहार जाने की आवश्यकता नहीं है ।यहां रोजगार की अपार सम्भावनाएं हैं । रूलर डप्लवमेंट के अंदर पर्यटन,ट्रेकिंग, जड़ी बूटी, एवं अनेक प्राकृतिक दृश्यों से भी सम्भावनाएं अनन्त हैं सरकार इस प्रकार के दुर्गम स्थानों के लिए ठोस नीति बनाये तो यह राज्य हिमांचल की तरह समर्द्ध हो सकता है ।देवेंद्र दत्त के छोटे भाई डॉ सुनील दत्त थपलियाल जो स्वयं श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश मे प्रवक्ता है ।उनका कहना है कि हमारे अग्रज ने कभी हार स्वीकार नहीं की स्वयं संघर्षों के माध्यम से गांव मे नई नई चीजों को ले जाने का श्रेय प्राप्त किया हर प्रकार का कार्य किया जहाँ अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद बड़े पद पर रहकर सरलता सहजता की प्रतिमूर्ति रहकर तकनीशियन से लेकर छोटे से श्रमिक बनकर कार्य किया है,
अपनी जड़ी बूटी के साथ गांव मे पहली बार हाथ से चलने वाला ट्रैक्टर ले गये जिससे खेती की जुताई ओर सरल हुई है ।आज की समस्या को देखते हुए अनेक युवाओं की प्रेरणा बने है देवेंद्र थपलियाल जो शहरों की भीड़ से आकर अनेक युवाओं को मार्ग दर्शन दे रहे हैं ।

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