लोक गायक लेखराज भण्डारी के गीतों पर झूम उठते हैं श्रोता

लोक गायक लेखराज भण्डारी के गीतों पर झूम उठते हैं श्रोता

ऋषिकेश-उनके गीतों पर श्रोता झूम उठते हैंं।अनेकों सूपरहिट गीत और दर्जनों एलबम के जरिए लोक गायकों में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई है।

 

 

 

जी हां ,हम बात कर रहे हैं देवभूमि उत्तराखंड के सबसे रमणीक तपोवन क्षेत्र निवासी लेखराज भण्डारी की ।
उत्तराखंड के गढ रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी को अपनी प्रेरणा श्रोत मानने वाले लेखराज यूं तो बचपन से ही गायकी के शौकीन थे।लेकिन उनका यह शौक कब जनून बन जायेगा इसका उन्हें खुद भी पता नही चला।लेखराज ने बताया कि शुरूआती दौर में उन्होंने
नगर के श्री भरत मंदिर इण्टर कालेज में शिक्षण के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्टेज पर आकर गाना शुरू किया था।उनकी प्रतिभा को जब तत्कालीन प्रधानाचार्य कैप्टन डी डी तिवाड़ी से प्रोत्साहन मिला तो उनके गायन के शौक को नये पंख लग गये।उसके बाद वह संगीत में ही पूरी तरह से डूब गये। उत्तराखंड सहित देश के कई राज्यों में अपनी लोकमाधुर्य से भरी गायिकी का जादू बिखेर चुके लेखराज भण्डारी बताते हैं कि यदि आप उत्तराखंडी समाज, यहां की सभ्यता, संस्कृति, लोकजीवन, राजनीति आदि के बारे में जानना चाहते हैं तो गढ गीत.सबसे शसक्त माध्यम हैं।मेरी शैलू छोरी,हे दगड़या तेरा मुलुक,मेरी प्यारी दिल की प्यारी,मेरी माया मोहनी जैसे गीतों के जरिए श्रोताओं के दिलों पर छा जाने वाले लेखराज दर्शकों से दूर होती जा रही गढवाली फिल्मों को लेकर मायूस नजर आये।उन्होंने बताया कि अब प्रोड्यूसर भी नये प्रोजेक्ट पर हाथ डालने से घबराने लगें हैं।ऐसे में कलाकारों ने खुद ही पैसा लगाकर एक्टर -एक्ट्रैस बनने का शौक पूरा करने की परम्परा शुरू कर दी है।इसकी वजह से प्रतिभावान कलाकार आगे नही बड़ पा रहे हैं। हांलाकि वह मानते हैं कि ट्यूब चैनल के जरिए अनेकों प्रतिभाओं ने अपनी पहचान बनाई है जोकि उत्साह जगाने वाली है।

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