कोरोना युद्व में खुद को झौंंका पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत ने

कोरोना युद्व में खुद को झौंंका पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत ने

ऋषिकेश-कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में तीर्थ नगरी ऋषिकेश में श्री भरत मंदिर इण्टर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत द्वारा लगातार गरीबों एवं जरूरतमंद लोगों की मदद की जा रही है।

 

 

तकाजा है वक्त का कि जूझो तूफां से, कब तक चलोगे किनारे-किनारे। वक्त का तकाजा कहें या लॉकडाउन की मजबूरी, ऐसे मुश्किल वक्त में लोगों की मदद के लिए शहर में पुलिस प्रशासन के साथ विभिन्न संस्थाएं जुटी हुई हैं।इन सबके बीच कोरोना के खिलाफ सीधी जंग में नगर के पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत ने भी खुद को झौंक रखा है।वह दूधमूहें बच्चों के अभिभावकों को पैकेट बंद दूध के डिब्बे देकर मुश्किल घड़ी में उनकी मदद कर रहे हैं।इसके अलावा गरीबो एवं जरूरत मंद लोगों के लिए भोजन एवं राशन की व्यवस्था भी उनके द्वारा की जा रही है जिसमें पुलिस प्रशासन की मदद से सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए लगातार यह अभियान चलाया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि डीबीपीएस रावत का शुमार तीर्थ नगरी ऋषिकेश में आर्दश शिक्षक के तौर पर किया जाता है।श्री भरत मंदिर इण्टर कालेज से प्रधानाचार्य पद पर वर्षों तक उत्कृष्ट सेवाएं देकर कुछ माह पूर्व सेवानिवृत्त हुए श्री रावत ने उसके बाद अपना जीवन समाजसेवा में सर्मपित कर दिया था।इस बीच कोरोना वैश्विक महामारी का प्रकोप देश में बड़ने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से इस युद्व में झौंक दिया और लोगों की सेवा में जुट गये।
वह राहत सामग्री के साथ मास्क और सैनिटाइजर भी बांट रहे हैं, ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण से अधिकाधिक लोगों को बचाया जा सके। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कोरोना वायरस से सचेत व बचकर रहने, घर में रहकर सुरक्षित रहने की सलाह भी अभिभावक बनकर दे रहे हैं।उनके इस सराहनीय कदम की हर तरफ प्रशंसा भी हो रही है।हांलाकि वह खुद मानते हैं कि कोरोना युद्व के रियल हीरो चिकित्सक, पुलिसकर्मी ,सफाईकर्मी हैं जो तमाम विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान को जोखिम में डालकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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